शुरुआत उत्तर प्रदेश के कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष राज बब्बर के शनिवार को किए इस ट्वीट से हुई. ट्वीट के साथ उन्होंने एक तस्वीर भी पोस्ट की थी जिसमें सपना चौधरी प्रियंका गांधी के साथ खड़ी मुस्कुराती दिख रही थीं.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ भी सपना चौधरी नई दिल्ली में राज बब्बर के घर जाकर कांग्रेस में शामिल हुईं. उनकी कुछ तस्वीरें भी सोशल मीडिया में वायरल हुईं जिनमें वो किसी फ़ॉर्म पर हस्ताक्षर करती हुई दिख रही हैं.
ऐसे कयास भी लगाए जा रहे थे कि वो कांग्रेस की तरफ़ से उत्तर प्रदेश की मथुरा सीट से चुनाव लड़ सकती हैं.
इन सबके बाद मीडिया और सियासी गलियारों में हलचल मच गई थी क्योंकि मथुरा से जानी-मानी फ़िल्म स्टार हेमामालिनी सांसद हैं. ऐसे में माना जा रहा था कि ये दो सितारों के बीच का मुक़ाबला होगा लेकिन सपना ने रविवार की दोपहर अचानक एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस करके इन सारे कयासों पर विराम लगा दिया.
सपना ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, "मेरा कोई ट्विटर अकाउंट नहीं हैं. मैं सिर्फ़ फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम चलाती हूं. मेरी प्रियंका गांधी के साथ जो तस्वीर वायरल हो रही है, वो पुरानी है. न ही मैं राज बब्बर से मिली हूं."
पर्ची पर हस्ताक्षर करते हुए अपनी तस्वीर के बारे में पूछे जाने पर सपना ने कहा, "मैं इतनी पढ़ी-लिखी नहीं हूं कि आपको बता पाऊं कि वो पर्ची किससे सम्बन्धित थी."
उन्होंने कहा, "मैं प्रियंका जी से कई बार मिली हूं. तीन चार के दिन अंदर भी मिली हूं, उससे पहले भी मिली हूं. वो बहुत अच्छी हैं लेकिन यहां छोटी सी बात की इतना बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है. मेरे लिए सभी पार्टियां बराबर हैं. मैं सबसे मिलती हूं. मैं बीजेपी से मिलती हूं, मैं कांग्रेस से मिलती हूं, मैं अखिलेश की पार्टी से मिलती हूं, मैं आम आदमी पार्टी से मिलती हूं. मेरी कोई जाति नहीं है, कोई धर्म नहीं है. मैं एक कलाकार थी और कलाकार ही रहूंगी. मैंने मीडिया से बार-बार कहा है कि मैं राजनीति में नहीं आ रही हूं. अगर मैं पॉलिटिक्स में आई तो आप सबको बुलाकर इतने ही प्यार से बताऊंगी, जैसे अभी बता रही हूं."
सपना के कांग्रेस में शामिल होने की ख़बर आने के बाद बीजेपी के कुछ नेताओं ने उन पर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणियां भी की थीं. सोशल मीडिया पर भी उन्हें ट्रोल किया जा रहा था.
बीजेपी के हरियाणा नेता अश्विनी कुमार चोपड़ा ने कहा, "कांग्रेस में ठुमके लगाने वाले जो हैं वो ही ठुमके लगाएंगे, ये उनको देखना है कि ठुमके लगाने हैं या चुनाव जीतना है."
उत्तर प्रदेश में बीजेपी के विधायक सुरेंद्र सिंह ने सपना चौधरी के नृत्य के साथ सोनिया गांधी को लेकर भी बयान दे दिया, जो आपत्तिजनक भी है. हम उनका पूरा बयान यहां छाप भी नहीं सकते.
हालांकि उन्होंने ये भी कहा, "मुझे ख़ुशी है कि राहुल जी नेताओं पर भरोसा हटाकर नर्तकी पर भरोसा करना चालू कर दिए."
ख़ुद पर की जा रही निजी और आपत्तिजनक टिप्पणियों के बारे में सपना ने कहा, "अगर मुझे कोई 'नाचनेवाली' कहता है तो मुझे इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता. मैं तो ख़ुद कहती हूं कि मैं डांसर हूं. ये उनकी मानसिकता है. अब मैं इतनी छोटी हूं, ऐसे लोगों को क्या समझाऊं."
राजनीति से जुड़े सवाल पूछे जाने पर सपना ने पत्रकारों से कहा, "मैं एक आर्टिस्ट हूं. कृपया मुझसे उसी बारे में सवाल पूछें. लेकिन अगर आप लोग चाहते हैं और बार-बार कह रहे हैं तो आपके मुंह में घी-शक्कर. मैं एक न दिन नेता बन ही जाऊंगी."
सपना ने ये भी कहा कि उनकी उम्र 25 साल से कम है और ऐसे में लोकसभा चुनाव लड़ने का सवाल ही खड़ा नहीं होता. प्रेस कॉन्फ़्रेंस के आख़िर उन्होंने ये भी साफ़ किया कि वो न ही कांग्रेस और न किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी में शामिल होने जा रही हैं.
सपना की प्रेस कॉन्फ़्रेंस के बाद उत्तर प्रदेश के कांग्रेस सचिव नरेंद्र राठी ने टीवी चैनलों पर उनके दावों का खंडन किया और कहा कि उन्होंने ख़ुद ही शनिवार शाम 8:30 बजे के लगभग आकर पार्टी की सदस्यता का फ़ॉर्म भरा और इस पर उनका हस्ताक्षर भी है.
उन्होंने कहा, "सपना चौधरी और उनकी बहन, दोनों कल कांग्रेस में शामिल हुई थीं. हमारे पास उनके फ़ॉर्म हैं."
समाचार एजेंसी एएनआई ने इन फ़ॉर्मों की तस्वीरें भी जारी की हैं जिन पर 23/03/2019 की तारीख़ से सपना के हस्ताक्षर हैं. लेकिन इनमें से एक फ़ॉर्म पर लिखा हुआ है कि 'सपना चौधरी को 2011-2015 तक की सदस्यता दी जाती है'. वहीं दूसरे फ़ॉर्म में लिखा हुआ है- 2017-22 तक की सदस्यता दी जाती है.
हरियाणा के रोहतक से बिग बॉस के घर तक पहुंचने वाली सपना को 'सॉलिड बॉडी', 'छोरी भैंस बड़ी बिंदास' और 'तेरी आख्यां दा काजल' जैसे गानों ने यू ट्यूब सनसनी और सोशल मीडिया स्टार बनाया.
आज फ़ेसबुक पर उनके लगभग 30 लाख और इंस्टाग्राम पर लगभग 20 लाख फ़ॉलोअर हैं. सपना जो गाने गाती हैं उन्हें हरियाणवी लोकगीत 'रागिनी' के नाम से जाना जाता है.
वो 'वीरे दी वेडिंग' और 'नानू की जानू' जैसी कुछ फ़िल्मों में भी नज़र आ चुकी हैं. हालांकि उनका ये सफ़र इतना आसान नहीं था.
एक वक़्त था जब सपना रोज़ आने वाले भद्दे और आपत्तिजनक मैसेज और कमेंट्स से तंग आकर ख़ुदकुशी करना चाहती थीं.
ये सब तब हुआ जब साल 2016 में सपना पर अपने एक गाने में दलित विरोधी शब्द इस्तेमाल करने का आरोप लगा और गुड़गांव में उनके ख़िलाफ़ एससी/एसटी ऐक्ट के तहत केस भी दर्ज हुआ. हालांकि बाद में मामला शांत हुआ और उन्हें बचा लिया गया.
Monday, March 25, 2019
Monday, March 18, 2019
वेनेज़ुएला ने भारत को रुपए से तेल लेने का दिया प्रस्तावः आज की पांच बड़ी ख़बरें
वेनेज़ुएला ने भारत को रुपए से तेल ख़रीदने का प्रस्ताव दिया है और भारत इस पर विचार कर रहा है. दक्षिणी अमरीकी देश वेनेज़ुएला से भारत को अमरीकी प्रतिबंधों के कारण तेल आयात करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए डॉलर के बदले रुपए का विकल्प प्रभावी हो सकता है.
वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मडुरो को अमरीका सत्ता से हटाना चाहता है लेकिन मडुरो सत्ता छोड़ने को तैयार नहीं है. इसी तनातनी में अमरीका ने वेनेज़ुएला पर कई प्रतिबंध लगा रखे हैं. इसी साल जनवरी महीने में अमरीका ने वेनेज़ुएला के विपक्षी नेता वैन ग्वाडो को राष्ट्रपति की मान्यता दे दी है. अमरीका प्रतिबंधों के माध्यम के मडुरो पर अधिकतम दबाव बनाना चाहता है.
अमरीका भारत पर राजनयिक दबाव बना रहा है कि वो वेनेज़ुएला से तेल आयात में कटौती करे. ऐसे में भारत के पास दो विकल्प हैं. या तो भारत आयात बंद करे या भुगतान के लिए दूसरे विकल्पों पर विचार करे.
भारत पहले अपनी रिफाइनरी कंपनियों से कह चुका है कि वो अमरीकी नियंत्रण वाले भुगतान सिस्टम से बचें. अभी रिलायंस इंडस्ट्रीज और नयारा एनर्जी वेनेज़ुएला से हर दिन तीन लाख बैरल तेल आयात कर रही हैं.
अमरीकी दबाव से बचने के लिए दोनों देश पूरा भुगतान रुपए में करने पर विचार करे रहे हैं. भारत ईरान के साथ भी ऐसा ही कर रहा है. ईरान पर भी अमरीकी प्रतिबंध लगे हुए हैं. तेल मंत्रालय ने वेनेज़ुएला के इस प्रस्ताव को विदेश मंत्रालय के पास भेजा है.
लोकसभा चुनावों से पहले जम्मू-कश्मीर में एक नई पार्टी की उदय हुआ है.
आईएएस की नौकरी छोड़ चुके शाह फ़ैसल ने रविवार को अपनी नई राजनीतिक पार्टी का ऐलान किया. इस पार्टी में जेएनयू की छात्रनेता शेहला रशीद को भी शामिल किया गया है.
पार्टी की घोषणा के वक़्त शाह फैसल ने कहा, "मैं कश्मीर और दिल्ली के बीच ख़ाली जगह को भरने वाली आवाज़ बनूंगा."
पश्चिम बंगाल में अकेले चुनाव लड़ेगी कांग्रेस
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ सकती है. यहां सीपीएम और कांग्रेस पार्टी के बीच गठबंधन की बात चल रही थी, लेकिन इसके सफल होने की उम्मीद अब नज़र नहीं आ रही है.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सोमेन मित्र ने कहा कि लेफ्ट पार्टी उनकी पार्टी को निर्देशित नहीं कर सकती है कि उनके उम्मीदवार कौन होंगे और कौन नहीं.
सोमेन ने कहा, "हम पार्टी इकाई ने यह निर्णय लिया है कि हम अपनी गरिमा से समझौता करके कोई गठबंधन नहीं करेंगे. वामपंथी पार्टी यह तय नहीं कर सकती है कि हमारा उम्मीदवार कौन होगा. हम बंगाल में अकेले चुनाव लड़ेंगे."
हालांकि सीपीआईएम के सचिव सूर्यकांत मिश्र ने आधिकारिक घोषणा तक इस मुद्दे पर कुछ बोलने से इनकार कर दिया है.
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा सोमवार से उत्तर प्रदेश में गंगा यात्रा की शुरुआत करेंगी.
वो अपने पैतृक शहर प्रयागराज यानी इलाहाबाद से इसकी शुरुआत करेंगी.
यात्रा से पहले रविवार को एक खुली चिट्ठी में उन्होंने कहा कि वह सूबे के लोगों से सीधा संवाद स्थापित करना चाहती हैं.
यह यात्रा चार दिनों तक चलेगी.
ब्राज़ील के राष्ट्रपति जेयर बोलसोनारो अपनी पहली आधिकारिक विदेश दौरे पर अमरीका पहुंच गए हैं.
वो मंगलवार को वाइट हाउस में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से मुलाकात करने वाले हैं. बताया जा रहा है कि दोनों के बीच वेनेज़ुएला के सियासी संकट के मसले पर भी बातचीत होगी.
जेयर बोलसोनारो ट्रंप और उनकी नीतियों की सार्वजनिक तौर पर तारीफ़ कर चुके हैं. बोलसोनारो ट्वीट करके कहा है कि बहुत वक़्त बाद ब्राज़ील का ऐसा राष्ट्रपति अमरीका दौरे पर है जो अमरीका-विरोधी नहीं है.
वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मडुरो को अमरीका सत्ता से हटाना चाहता है लेकिन मडुरो सत्ता छोड़ने को तैयार नहीं है. इसी तनातनी में अमरीका ने वेनेज़ुएला पर कई प्रतिबंध लगा रखे हैं. इसी साल जनवरी महीने में अमरीका ने वेनेज़ुएला के विपक्षी नेता वैन ग्वाडो को राष्ट्रपति की मान्यता दे दी है. अमरीका प्रतिबंधों के माध्यम के मडुरो पर अधिकतम दबाव बनाना चाहता है.
अमरीका भारत पर राजनयिक दबाव बना रहा है कि वो वेनेज़ुएला से तेल आयात में कटौती करे. ऐसे में भारत के पास दो विकल्प हैं. या तो भारत आयात बंद करे या भुगतान के लिए दूसरे विकल्पों पर विचार करे.
भारत पहले अपनी रिफाइनरी कंपनियों से कह चुका है कि वो अमरीकी नियंत्रण वाले भुगतान सिस्टम से बचें. अभी रिलायंस इंडस्ट्रीज और नयारा एनर्जी वेनेज़ुएला से हर दिन तीन लाख बैरल तेल आयात कर रही हैं.
अमरीकी दबाव से बचने के लिए दोनों देश पूरा भुगतान रुपए में करने पर विचार करे रहे हैं. भारत ईरान के साथ भी ऐसा ही कर रहा है. ईरान पर भी अमरीकी प्रतिबंध लगे हुए हैं. तेल मंत्रालय ने वेनेज़ुएला के इस प्रस्ताव को विदेश मंत्रालय के पास भेजा है.
लोकसभा चुनावों से पहले जम्मू-कश्मीर में एक नई पार्टी की उदय हुआ है.
आईएएस की नौकरी छोड़ चुके शाह फ़ैसल ने रविवार को अपनी नई राजनीतिक पार्टी का ऐलान किया. इस पार्टी में जेएनयू की छात्रनेता शेहला रशीद को भी शामिल किया गया है.
पार्टी की घोषणा के वक़्त शाह फैसल ने कहा, "मैं कश्मीर और दिल्ली के बीच ख़ाली जगह को भरने वाली आवाज़ बनूंगा."
पश्चिम बंगाल में अकेले चुनाव लड़ेगी कांग्रेस
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ सकती है. यहां सीपीएम और कांग्रेस पार्टी के बीच गठबंधन की बात चल रही थी, लेकिन इसके सफल होने की उम्मीद अब नज़र नहीं आ रही है.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सोमेन मित्र ने कहा कि लेफ्ट पार्टी उनकी पार्टी को निर्देशित नहीं कर सकती है कि उनके उम्मीदवार कौन होंगे और कौन नहीं.
सोमेन ने कहा, "हम पार्टी इकाई ने यह निर्णय लिया है कि हम अपनी गरिमा से समझौता करके कोई गठबंधन नहीं करेंगे. वामपंथी पार्टी यह तय नहीं कर सकती है कि हमारा उम्मीदवार कौन होगा. हम बंगाल में अकेले चुनाव लड़ेंगे."
हालांकि सीपीआईएम के सचिव सूर्यकांत मिश्र ने आधिकारिक घोषणा तक इस मुद्दे पर कुछ बोलने से इनकार कर दिया है.
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा सोमवार से उत्तर प्रदेश में गंगा यात्रा की शुरुआत करेंगी.
वो अपने पैतृक शहर प्रयागराज यानी इलाहाबाद से इसकी शुरुआत करेंगी.
यात्रा से पहले रविवार को एक खुली चिट्ठी में उन्होंने कहा कि वह सूबे के लोगों से सीधा संवाद स्थापित करना चाहती हैं.
यह यात्रा चार दिनों तक चलेगी.
ब्राज़ील के राष्ट्रपति जेयर बोलसोनारो अपनी पहली आधिकारिक विदेश दौरे पर अमरीका पहुंच गए हैं.
वो मंगलवार को वाइट हाउस में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से मुलाकात करने वाले हैं. बताया जा रहा है कि दोनों के बीच वेनेज़ुएला के सियासी संकट के मसले पर भी बातचीत होगी.
जेयर बोलसोनारो ट्रंप और उनकी नीतियों की सार्वजनिक तौर पर तारीफ़ कर चुके हैं. बोलसोनारो ट्वीट करके कहा है कि बहुत वक़्त बाद ब्राज़ील का ऐसा राष्ट्रपति अमरीका दौरे पर है जो अमरीका-विरोधी नहीं है.
Friday, March 15, 2019
मसूद अज़हर को बचाने में क्या है चीन का स्वार्थ- नज़रिया
चीन ने एक बार फिर पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के प्रस्ताव पर 'टेक्निकल होल्ड' लगा दिया है.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 1267 के तहत स्थापित प्रतिबंध समिति के तहत वैश्विक आतंकवादी घोषित होने के बाद व्यक्ति किसी भी देश की यात्रा नहीं कर सकता.
पूरी दुनिया में उसकी संपत्तियां जब्त कर ली जाती हैं और किसी भी देश से हथियार नहीं ख़रीद सकता. चीन ने अपने वीटो का इस्तेमाल कर इस प्रस्ताव पर रोक लगा दी है. चीन का कहना है कि उसे '' इस मामले में और ज़्यादा अध्ययन '' करने की ज़रूरत है.
चार बार चीन ख़ारिज कर चुका है प्रस्ताव
मुंबई में हुए 26/11 हमले के बाद साल 2009 में भारत ने पहली बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ये प्रस्ताव पेश किया था. साल 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले के बाद भारत ने फिर इस प्रस्ताव को पेश किया.
इस बार भारत का साथ दिया यूनाइटेड किंगडम, अमरीका और फ्रांस ने. इन तीनों ही देशों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी देश का दर्जा प्राप्त है लेकिन ये प्रस्ताव पास नहीं हो सका.
साल 2017 में जम्मू-कश्मीर के उड़ी में सेना के कैम्प में हुए हमले के बाद भारत ने फिर ये प्रस्ताव यूएन में पेश किया और इन तीनों ही बार चीन ने ये कहते हुए 'टेक्निकल होल्ड' लगाया कि उसे इस मुद्दे को समझने के लिए और समय चाहिए.
इस बीच दुनिया भर में जारी आतंकवादी हमलों ने अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद से लड़ने की भारत की पहल को और मज़बूत किया. अमरीका में हुए 9/11 हमले के बाद साल 2001 में यूएन सुरक्षा परिषद ने कई संगठनों पर प्रतिबंध लगाया जिसमें जैश ए मोहम्मद भी शामिल रहा. लेकिन इसके बाद भी मसूद अज़हर ने कई हमले किए और इसकी बकायदा ज़िम्मेदारी भी लेता रहा.
बीते बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमरीका, यूके और फ़्रांस की सहमति के बाद भी चीन के वीटो के इस्तेमल के कारण ये प्रस्ताव रद्द हो गया.
14 फ़रवरी को पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले में 40 जवान मारे गए, जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने '' जघन्य और कायरतापूर्ण '' अपराध बताया था. जब ये बयान दिया गया तो इस बैठक में चीन भी शामिल था. इस हमले की ज़िम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी.
26 फ़रवरी को भारत ने पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक किया जिस पर उसे दुनिया की तमाम शक्तियों की ओर से समर्थन मिला. इसके ठीक एक दिन बाद भारत, चीन और रूस के विदेश मंत्रियों के बीच बैठक चीन में हुई. इस बैठक में आतंकवाद को ख़त्म करने की तय सीमा को आगे बढ़ा दिया गया.
इस बैठक के बाद जारी की गई विज्ञप्ति में कहा गया कि आंतकवाद और ऐसे संगठनों से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की ज़रूरत होगी. इसमें ये भी कहा गया कि आतंकवाद को राजनीतिक फ़ायदे के लिए क़तई इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. ब्रिक्स 2017 में भी भारत, चीन और रूस आतंकवाद के मुद्दे को संबोधित कर चुके हैं.
बीजिंग की ओर से लागातार दिए जा रहे ऐसे संकेतों को देखते हुए उम्मीद जताई जा रही थी कि साल 2011 से मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने में अडंगा लगाने वाला चीन इस बार आतंकवाद पर साथ खड़ा हो सकता है.
14 फ़रवरी की घटना के बाद मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की है और भारत को अपना समर्थन दिया है. रूस ने भारत को ये भी भरोसा दिलाया कि वह मसूद अज़हर को आतंकवादी घोषित करने के प्रस्ताव पर भारत का साथ देगा.
मॉस्को भारत का संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में समर्थन करता रहा है. कश्मीर के मुद्दे पर भी अंतर्राष्ट्रीय मंच पर वह भारत के साथ खड़ा रहा है.
मसूद अज़हर को पाकिस्तान का समर्थन प्राप्त है. बीबीसी को दिए इंटरव्यू में पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने माना था कि वह पाकिस्तान में ही रह रहा है और काफ़ी बीमार है.
इन सबके सामने चीन का टेक्नीकल होल्ड' बताता है कि वह अपने 'पुराने सहयोगी' के लिए आतंकवाद जैसी बड़ी क़ीमत भी चुकाने को तैयार है. पिछले रिकॉर्ड्स को देखें को ये चीन की फ़ितरत रही है और पाकिस्तान को आतंकवाद के मामले में भी चीन समर्थन देता रहा है.
आख़िर क्यों पाकिस्तान के चरमपंथियों के लिए नरम है चीन?
ये समझने की ज़रूरत है कि आख़िर क्यों चीन पाकिस्तान समर्थित चरमपंथी संगठनों को सुरक्षा देने के लिए संयुक्त राष्ट्र जैसे मंच का इस्तेमाल करता है.
साल 1980 में अज़हर ने अफ़ग़ानिस्तान में सोवियत सेनाओं से लड़कर अपने जीवन की शुरुआत की थी और इसके बाद में जैश की स्थापना की.
यह पाकिस्तान के इस्लामीकरण का वक़्त था. इस वक़्त अफ़ग़ानिस्तान में सोवियत सेना से लड़ने के लिए छात्रों को मुजाहिदीन के रूप भेजा जा रहा था.
चीन का एंटी सोवियत मुजाहिदीन से संबंध भी इसी दौर में शुरू हुआ. इसकी वजह से साल 1980, 1981, 1985 , 1987 और अप्रैल 1990 में हुए चीन विरोधी प्रदर्शनों के दौरान मुसलमान-बहुल प्रांत शिनजियांग के सैकड़ों वीगर मुसलमान मुजाहिदीन बनाए गए.
1989 में सोवियत ने अफ़ग़ानिस्तान से वीगर मुजाहिदीनों को रिहा कर दिया ताकि शिनजियांग में ये विरोध प्रदर्शन उरुमची, काशगर और खोतान जैसे बड़े शहरों से होते हुए कुचा, अक्सू और आर्टुश जैसे छोटे शहरों में फैल गए.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 1267 के तहत स्थापित प्रतिबंध समिति के तहत वैश्विक आतंकवादी घोषित होने के बाद व्यक्ति किसी भी देश की यात्रा नहीं कर सकता.
पूरी दुनिया में उसकी संपत्तियां जब्त कर ली जाती हैं और किसी भी देश से हथियार नहीं ख़रीद सकता. चीन ने अपने वीटो का इस्तेमाल कर इस प्रस्ताव पर रोक लगा दी है. चीन का कहना है कि उसे '' इस मामले में और ज़्यादा अध्ययन '' करने की ज़रूरत है.
चार बार चीन ख़ारिज कर चुका है प्रस्ताव
मुंबई में हुए 26/11 हमले के बाद साल 2009 में भारत ने पहली बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ये प्रस्ताव पेश किया था. साल 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले के बाद भारत ने फिर इस प्रस्ताव को पेश किया.
इस बार भारत का साथ दिया यूनाइटेड किंगडम, अमरीका और फ्रांस ने. इन तीनों ही देशों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी देश का दर्जा प्राप्त है लेकिन ये प्रस्ताव पास नहीं हो सका.
साल 2017 में जम्मू-कश्मीर के उड़ी में सेना के कैम्प में हुए हमले के बाद भारत ने फिर ये प्रस्ताव यूएन में पेश किया और इन तीनों ही बार चीन ने ये कहते हुए 'टेक्निकल होल्ड' लगाया कि उसे इस मुद्दे को समझने के लिए और समय चाहिए.
इस बीच दुनिया भर में जारी आतंकवादी हमलों ने अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद से लड़ने की भारत की पहल को और मज़बूत किया. अमरीका में हुए 9/11 हमले के बाद साल 2001 में यूएन सुरक्षा परिषद ने कई संगठनों पर प्रतिबंध लगाया जिसमें जैश ए मोहम्मद भी शामिल रहा. लेकिन इसके बाद भी मसूद अज़हर ने कई हमले किए और इसकी बकायदा ज़िम्मेदारी भी लेता रहा.
बीते बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमरीका, यूके और फ़्रांस की सहमति के बाद भी चीन के वीटो के इस्तेमल के कारण ये प्रस्ताव रद्द हो गया.
14 फ़रवरी को पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले में 40 जवान मारे गए, जिसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने '' जघन्य और कायरतापूर्ण '' अपराध बताया था. जब ये बयान दिया गया तो इस बैठक में चीन भी शामिल था. इस हमले की ज़िम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी.
26 फ़रवरी को भारत ने पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक किया जिस पर उसे दुनिया की तमाम शक्तियों की ओर से समर्थन मिला. इसके ठीक एक दिन बाद भारत, चीन और रूस के विदेश मंत्रियों के बीच बैठक चीन में हुई. इस बैठक में आतंकवाद को ख़त्म करने की तय सीमा को आगे बढ़ा दिया गया.
इस बैठक के बाद जारी की गई विज्ञप्ति में कहा गया कि आंतकवाद और ऐसे संगठनों से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की ज़रूरत होगी. इसमें ये भी कहा गया कि आतंकवाद को राजनीतिक फ़ायदे के लिए क़तई इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. ब्रिक्स 2017 में भी भारत, चीन और रूस आतंकवाद के मुद्दे को संबोधित कर चुके हैं.
बीजिंग की ओर से लागातार दिए जा रहे ऐसे संकेतों को देखते हुए उम्मीद जताई जा रही थी कि साल 2011 से मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने में अडंगा लगाने वाला चीन इस बार आतंकवाद पर साथ खड़ा हो सकता है.
14 फ़रवरी की घटना के बाद मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की है और भारत को अपना समर्थन दिया है. रूस ने भारत को ये भी भरोसा दिलाया कि वह मसूद अज़हर को आतंकवादी घोषित करने के प्रस्ताव पर भारत का साथ देगा.
मॉस्को भारत का संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में समर्थन करता रहा है. कश्मीर के मुद्दे पर भी अंतर्राष्ट्रीय मंच पर वह भारत के साथ खड़ा रहा है.
मसूद अज़हर को पाकिस्तान का समर्थन प्राप्त है. बीबीसी को दिए इंटरव्यू में पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने माना था कि वह पाकिस्तान में ही रह रहा है और काफ़ी बीमार है.
इन सबके सामने चीन का टेक्नीकल होल्ड' बताता है कि वह अपने 'पुराने सहयोगी' के लिए आतंकवाद जैसी बड़ी क़ीमत भी चुकाने को तैयार है. पिछले रिकॉर्ड्स को देखें को ये चीन की फ़ितरत रही है और पाकिस्तान को आतंकवाद के मामले में भी चीन समर्थन देता रहा है.
आख़िर क्यों पाकिस्तान के चरमपंथियों के लिए नरम है चीन?
ये समझने की ज़रूरत है कि आख़िर क्यों चीन पाकिस्तान समर्थित चरमपंथी संगठनों को सुरक्षा देने के लिए संयुक्त राष्ट्र जैसे मंच का इस्तेमाल करता है.
साल 1980 में अज़हर ने अफ़ग़ानिस्तान में सोवियत सेनाओं से लड़कर अपने जीवन की शुरुआत की थी और इसके बाद में जैश की स्थापना की.
यह पाकिस्तान के इस्लामीकरण का वक़्त था. इस वक़्त अफ़ग़ानिस्तान में सोवियत सेना से लड़ने के लिए छात्रों को मुजाहिदीन के रूप भेजा जा रहा था.
चीन का एंटी सोवियत मुजाहिदीन से संबंध भी इसी दौर में शुरू हुआ. इसकी वजह से साल 1980, 1981, 1985 , 1987 और अप्रैल 1990 में हुए चीन विरोधी प्रदर्शनों के दौरान मुसलमान-बहुल प्रांत शिनजियांग के सैकड़ों वीगर मुसलमान मुजाहिदीन बनाए गए.
1989 में सोवियत ने अफ़ग़ानिस्तान से वीगर मुजाहिदीनों को रिहा कर दिया ताकि शिनजियांग में ये विरोध प्रदर्शन उरुमची, काशगर और खोतान जैसे बड़े शहरों से होते हुए कुचा, अक्सू और आर्टुश जैसे छोटे शहरों में फैल गए.
Monday, March 11, 2019
बीबीसी हिंदी संवाददाता प्रियंका दुबे को मिला पत्रकारिता का प्रतिष्ठित 'चमेली देवी जैन' पुरस्कार
बीबीसी हिंदी सेवा की संवाददाता प्रियंका दुबे को साल 2018 के पत्रकारिता के प्रतिष्ठित 'चमेली देवी जैन' पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. प्रियंका बीबीसी के दिल्ली ब्यूरो में पिछले एक साल से ज़्यादा वक़्त से 'बाइलिंगुअल जर्नलिस्ट' के तौर पर काम कर रही हैं.
पिछले 37 सालों से चमेली देवी जैन पुरस्कार हर साल भारत की एक सर्वश्रेष्ठ महिला पत्रकार को दिया जाता रहा है. इस पुरस्कार का नाम भारतीय स्वतंत्रता सेनानी चमेली देवी की याद में रखा गया है. पत्रकार के साल भर के काम के मूल्यांकन के अधार पर उसे पुरस्कार के लिए चुना जाता है.
'द ट्रिब्यून' अख़बार के पूर्व संपादक हरीश खरे के नेतृत्व वाला संस्थान 'द मीडिया फ़ाउंडेशन' चमेली देवी पुरस्कार देता है. इस सम्मान के लिए पूरे भारत से जानी-मानी महिला पत्रकार अपना नामांकन देती हैं.
किसने चुना प्रियंका को?
इस बार अवॉर्ड की जुरी में 'कैच न्यूज़' के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार भारत भूषण, न्यूज़ एक्स की नेशनल एडिटर (न्यूज़) शीला भट्ट और इंडियन एक्सप्रेस की नेशनल ओपिनियन एडिटर वंदिता मिश्रा शामिल थे.
इस साल अवॉर्ड के लिए कुल 30 नामांकन आए थे जिसमें से ज्यूरी ने 10 पत्रकारों को शॉर्टलिस्ट किया और इस तरह आख़िरकार प्रियंका को साल 2018 के लिए चमेली देवी जैन अवॉर्ड के लिए चुना गया.
किस आधार पर मिला पुरस्कार
प्रियंका दुबे को यह पुरस्कार उनकी विविधतापूर्ण, खोजी और महत्वपूर्ण सवाल उठाने वाली विस्तृत रिपोर्टिंग के लिए दिया गया.
'द मीडिया फ़ाउंडेशन' द्वारा जारी किए एक बयान में कहा गया कि प्रियंका को ये पुरस्कार मौजूदा वक़्त के ज्वलंत और जटिल राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर की गई रिपोर्टिंग के लिए दिया गया.
फ़ाउंडेशन के मुताबिक़ प्रियंका की न्यूज़ रिपोर्ट्स आज के गंभीर मुद्दों की उलझी हुई सच्चाई की परतें खोलने का काम करती हैं.
द मीडिया फ़ाउंडेशन ने शनिवार (9 मार्च, 2019) की शाम दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में पुरस्कार समारोह का आयोजन किया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी थे.
कार्यक्रम के अतिथियों में जाने-माने इतिहासकार और लेखक रामचंद्र गुहा, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश और मणिशंकर अय्यर समेत वरिष्ठ सामाजिक विज्ञानी आशीष नंदी उपस्थित थे.
'पत्रकारिता में मेरा भरोसा मज़बूत हुआ'
पूर्व राष्ट्रपति हामिद अंसारी के हाथों अवॉर्ड लेने के बाद प्रियंका दुबे ने एक भावुक भाषण में कहा कि 'चमेली देवी जैन पुरस्कार' पाकर उनका ईमानदार, निष्पक्ष और जनसरोकार वाली पत्रकारिता में भरोसा और मज़बूत हुआ है.
प्रियंका ने कहा, "मैं पिछले 9 सालों हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में रिपोर्टिंग कर रही हूं और मेरा अनुभव रहा है कि हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में होने वाली शानदार पत्रकारिता और रिपोर्टंग सिर्फ़ इसलिए हाशिये पर चली जाती है क्योंकि तथाकथित मुख्यधारा (अंग्रेज़ी मीडिया) के पत्रकार ये भाषाएं नहीं समझते. लेकिन इस पुरस्कार के बाद मुझे एक बार फिर यक़ीन हो गया है कि अच्छा काम, अच्छी स्टोरी और अच्छी रिपोर्टिंग सबके सामने आती ही है, चाहे वो दुनिया के किसी भी कोने में हो रही हो, किसी भी भाषा में हो रही हो."
प्रियंका ने कहा कि इस पुरस्कार का मिलना उन्हें और ज़्यादा ज़िम्मेदारी का अहसास दिलाता है. आख़िर में उन्होंने ये अवॉर्ड अपनी उस मां को समर्पित किया जिन्होंने हमेशा प्रियंका को पढ़ने के लिए 'एक और घंटा' दिलाने के लिए हर संभव कोशिश की.
पुरस्कार समारोह के बाद हामिद अंसारी ने बीजी वर्गीज़ मेमोरियल लेक्चर के तहत 'उग्र राष्ट्रवाद के दौर में पत्रकारिता' विषय पर अपने विचार रखे.
अंसारी ने अपने भाषण में कहा कि आज के दौर में 'राष्ट्रवाद' और 'राष्ट्रप्रेम' के बीच लकीर को मिटाने की पुरज़ोर कोशिश हो रही है जो सबके लिए ख़तरनाक है.
पूर्व उपराष्ट्रपति ने अपने भाषण में पेड न्यूज़, फ़ेक न्यूज़ और पत्रकारों के साथ होने वाली हिंसा जैसे मुद्दों का भी ज़िक्र किया.
अंसारी ने हालिया पुलवामा और बालाकोट हमले के संदर्भ में 'ऑफ़िशियल सीक्रेट ऐक्ट' को अप्रासंगिक बताया और कहा कि इस क़ानून पर एक बार फिर विचार किए जाने की ज़रूरत है.
पिछले 37 सालों से चमेली देवी जैन पुरस्कार हर साल भारत की एक सर्वश्रेष्ठ महिला पत्रकार को दिया जाता रहा है. इस पुरस्कार का नाम भारतीय स्वतंत्रता सेनानी चमेली देवी की याद में रखा गया है. पत्रकार के साल भर के काम के मूल्यांकन के अधार पर उसे पुरस्कार के लिए चुना जाता है.
'द ट्रिब्यून' अख़बार के पूर्व संपादक हरीश खरे के नेतृत्व वाला संस्थान 'द मीडिया फ़ाउंडेशन' चमेली देवी पुरस्कार देता है. इस सम्मान के लिए पूरे भारत से जानी-मानी महिला पत्रकार अपना नामांकन देती हैं.
किसने चुना प्रियंका को?
इस बार अवॉर्ड की जुरी में 'कैच न्यूज़' के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार भारत भूषण, न्यूज़ एक्स की नेशनल एडिटर (न्यूज़) शीला भट्ट और इंडियन एक्सप्रेस की नेशनल ओपिनियन एडिटर वंदिता मिश्रा शामिल थे.
इस साल अवॉर्ड के लिए कुल 30 नामांकन आए थे जिसमें से ज्यूरी ने 10 पत्रकारों को शॉर्टलिस्ट किया और इस तरह आख़िरकार प्रियंका को साल 2018 के लिए चमेली देवी जैन अवॉर्ड के लिए चुना गया.
किस आधार पर मिला पुरस्कार
प्रियंका दुबे को यह पुरस्कार उनकी विविधतापूर्ण, खोजी और महत्वपूर्ण सवाल उठाने वाली विस्तृत रिपोर्टिंग के लिए दिया गया.
'द मीडिया फ़ाउंडेशन' द्वारा जारी किए एक बयान में कहा गया कि प्रियंका को ये पुरस्कार मौजूदा वक़्त के ज्वलंत और जटिल राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर की गई रिपोर्टिंग के लिए दिया गया.
फ़ाउंडेशन के मुताबिक़ प्रियंका की न्यूज़ रिपोर्ट्स आज के गंभीर मुद्दों की उलझी हुई सच्चाई की परतें खोलने का काम करती हैं.
द मीडिया फ़ाउंडेशन ने शनिवार (9 मार्च, 2019) की शाम दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में पुरस्कार समारोह का आयोजन किया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी थे.
कार्यक्रम के अतिथियों में जाने-माने इतिहासकार और लेखक रामचंद्र गुहा, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश और मणिशंकर अय्यर समेत वरिष्ठ सामाजिक विज्ञानी आशीष नंदी उपस्थित थे.
'पत्रकारिता में मेरा भरोसा मज़बूत हुआ'
पूर्व राष्ट्रपति हामिद अंसारी के हाथों अवॉर्ड लेने के बाद प्रियंका दुबे ने एक भावुक भाषण में कहा कि 'चमेली देवी जैन पुरस्कार' पाकर उनका ईमानदार, निष्पक्ष और जनसरोकार वाली पत्रकारिता में भरोसा और मज़बूत हुआ है.
प्रियंका ने कहा, "मैं पिछले 9 सालों हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में रिपोर्टिंग कर रही हूं और मेरा अनुभव रहा है कि हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में होने वाली शानदार पत्रकारिता और रिपोर्टंग सिर्फ़ इसलिए हाशिये पर चली जाती है क्योंकि तथाकथित मुख्यधारा (अंग्रेज़ी मीडिया) के पत्रकार ये भाषाएं नहीं समझते. लेकिन इस पुरस्कार के बाद मुझे एक बार फिर यक़ीन हो गया है कि अच्छा काम, अच्छी स्टोरी और अच्छी रिपोर्टिंग सबके सामने आती ही है, चाहे वो दुनिया के किसी भी कोने में हो रही हो, किसी भी भाषा में हो रही हो."
प्रियंका ने कहा कि इस पुरस्कार का मिलना उन्हें और ज़्यादा ज़िम्मेदारी का अहसास दिलाता है. आख़िर में उन्होंने ये अवॉर्ड अपनी उस मां को समर्पित किया जिन्होंने हमेशा प्रियंका को पढ़ने के लिए 'एक और घंटा' दिलाने के लिए हर संभव कोशिश की.
पुरस्कार समारोह के बाद हामिद अंसारी ने बीजी वर्गीज़ मेमोरियल लेक्चर के तहत 'उग्र राष्ट्रवाद के दौर में पत्रकारिता' विषय पर अपने विचार रखे.
अंसारी ने अपने भाषण में कहा कि आज के दौर में 'राष्ट्रवाद' और 'राष्ट्रप्रेम' के बीच लकीर को मिटाने की पुरज़ोर कोशिश हो रही है जो सबके लिए ख़तरनाक है.
पूर्व उपराष्ट्रपति ने अपने भाषण में पेड न्यूज़, फ़ेक न्यूज़ और पत्रकारों के साथ होने वाली हिंसा जैसे मुद्दों का भी ज़िक्र किया.
अंसारी ने हालिया पुलवामा और बालाकोट हमले के संदर्भ में 'ऑफ़िशियल सीक्रेट ऐक्ट' को अप्रासंगिक बताया और कहा कि इस क़ानून पर एक बार फिर विचार किए जाने की ज़रूरत है.
Tuesday, March 5, 2019
हैदराबाद में भारत की ऑस्ट्रेलिया पर फ़तह
महेंद्र सिंह धोनी और केदार जाधव के बीच पांचवें विकेट के लिए 141 रनों की नाबाद साझेदारी की बदौलत भारत ने ऑस्ट्रेलिया को हैदराबाद वनडे में छह विकेट से हरा कर सिरीज़ में 1-0 की बढ़त ले ली है.
पांच मैचों की वनडे सिरीज़ के पहले मैच में ऑस्ट्रेलिया ने भारत के सामने 237 रनों का लक्ष्य रखा था. इसके बाद भारत ने 48.2 ओवर्स में चार विकेट के नुकसान पर 240 रन बनाकर जीत का लक्ष्य हासिल किया.
भारतीय पारी में केदार जाधव ने सर्वाधिक 81 रन बनाए. जाधव ने 87 गेंदों की अपनी पारी में नौ चौके और एक छक्का जड़ा. वहीं महेंद्र सिंह धोनी ने 72 गेंदों में छह चौके और एक छक्का जमाकर नाबाद 59 रनों की पारी खेली.
जाधव को उनके हरफनमौला प्रदर्शन के लिए 'मैन ऑफ़ द मैच' का पुरस्कार दिया गया. जाधव ने शानदार बल्लेबाज़ी के साथ-साथ गेंद से भी बेहतरीन प्रदर्शन किया. उन्होंने 7 ओवर में 31 रन देकर एक विकेट लिए.
कप्तान विराट कोहली ने 44 रन (45 गेंद, छह चौके एक छक्का) और रोहित शर्मा ने 37 रन (66 गेंद, पांच चौके) का योगदान दिया. इसके अलावा सलामी बल्लेबाज़ शिखर धवन बिना खाता खोले आउट हुए और अंबाति रायडु ने 13 रनों की पारी खेली.
मैच के बाद भारतीय कप्तान कोहली ने जाधव और धोनी के साथ-साथ गेंदबाज़ों की प्रशंसा करते हुए कहा, "यह एक मुश्किल मैच था. हमने वाकई अच्छी बल्लेबाज़ी की. गेंदबाज़ों ने हमारे लिए मैच बनाया और बल्लेबाज़ी के दौरान हमें एक बड़ी साझेदारी की ज़रूरत थी. आज धोनी और केदार ने इसकी ज़िम्मेदारी ली. दोनों ने बहुत बेहतरीन प्रदर्शन किया है."
वहीं ऑस्ट्रेलियाई कप्तान फिंच ने कहा, "मुझे लगता है हमें 20 या 30 रन और बनाने चाहिए थे. गेंदबाज़ों ने बढ़िया बॉल डाले. हालांकि हम लगातार विकेट लेने में कामयाब नहीं हुए जो किसी अच्छी टीम पर जीत के लिए बेहद ज़रूरी होता है."
दो टी20 मैचों की सिरीज़ को 0-2 से हारने के बाद भारत ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ पांच वनडे मैचों की सिरीज़ खेल रहा है.
पहले बल्लेबाज़ी करते हुए ऑस्ट्रेलिया की टीम ने निर्धारित 50 ओवरों में 7 विकेट गंवा कर 236 रन बनाए.
ऑस्ट्रेलियाई टीम की तरफ से सलामी बल्लेबाज़ उस्मान ख्वाजा ने सर्वाधिक 50 रन बनाए. उनके अलावा ग्लेन मैक्सवेल ने 40 रनों की पारी खेली.
वहीं भारतीय टीम के लिए जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी और कुलदीप यादव ने 2-2 विकेट लिए. वहीं केदार जाधव को एक विकेट मिला.
हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में खेले जा रहे इस मैच में ऑस्ट्रेलिया ने स्पिनर एश्टन टर्नर को अपना वनडे करियर शुरू करने का मौका दिया है वहीं कप्तान एरॉन फिंच के करियर का यह 100वां वनडे मैच है.
फिंच ने टॉस जीतने के बाद पहले बल्लेबाज़ी करने का फ़ैसला किया लेकिन वो खाता नहीं खोल सके.
उन्हें जसप्रीत बुमराह ने धोनी के हाथों कैच आउट किया. इस दौरान उन्होंने केवल तीन गेंदों को सामाना किया.
फिंच पिछले कुछ समय से ख़राब लय में चल रहे हैं. जून 2018 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ शतक जड़ने के बाद से आठ वनडे मैचों में उन्होंने केवल 83 रन बनाए हैं.
वनडे सिरीज़ से पहले भारत के साथ खेले गए दो टी20 मैचों को ऑस्ट्रेलिया ने ज़रूर जीता लेकिन वहां भी फिंच का बल्ला खामोश रहा. उन्होंने इन दो मैचों में शून्य और आठ का स्कोर किया.
2013 में वनडे क्रिकेट में अपने करियर का आगाज करने वाले फिंच अब तक 100 वनडे मैचों में 36.25 की औसत के साथ 11 शतकों और 18 अर्धशतकों समेत 3,444 रन बना चुके हैं.
इस दौरान वो 9 बार बिना खाता खोले ही पवेलियन लौटे हैं.
दूसरे ओवर में फिंच के आउट होने के बाद ऑस्ट्रेलिया का दूसरा विकेट 21वें ओवर में मार्कस स्टोइनिस (37) के रूप में गिरा. उन्हें केदार जाधव ने विराट कोहली के हाथों कैच आउट कराया.
इसके बाद कुलदीप यादव ने 24वें ओवर में उस्मान ख्वाजा को 30वें ओवर में पीटर हैंड्सकॉम्ब को आउट किया.
फिर मोहम्मद शमी ने 38वें ओवर में एश्टन टर्नर (21) को भी चलता कर दिया.
दूसरे टी20 में भारत से मैच छीनने वाले ग्लेन मैक्सवेल (40) को 40वें ओवर में बोल्ड कर मोहम्मद शमी ने ऑस्ट्रेलिया के किसी भी बड़े स्कोर की संभावना को धूमिल कर दिया.
पांच मैचों की यह एकदिवसीय सिरीज़ भारतीय टीम के लिए बहुत अहम है क्योंकि यह इंग्लैंड में होने वाली विश्व कप से पहले भारत का यह आखिरी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट है. हां, खिलाड़ियों के लिए आईपीएल में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर्स के साथ प्रैक्टिस करने का मौका ज़रूर मिलेगा.
कप्तान विराट कोहली ने मैच की पूर्वसंध्या पर इस बात के संकेत भी दिए कि यह सिरीज़ विश्व कप की टीम चुनने में अहम भूमिका निभाएगी.
उन्होंने कहा था कि, "मुझे नहीं लगता कि आईपीएल का विश्व कप चयन पर कोई प्रभाव पड़ेगा. आईपीएल में जाने से पहले ही हमें एक मजबूत टीम तैयार करना है. अगर कुछ खिलाड़ी आईपीएल में अच्छा नहीं करते हैं तो वो विश्व कप टीम से बाहर नहीं होंगे."
पांच मैचों की वनडे सिरीज़ के पहले मैच में ऑस्ट्रेलिया ने भारत के सामने 237 रनों का लक्ष्य रखा था. इसके बाद भारत ने 48.2 ओवर्स में चार विकेट के नुकसान पर 240 रन बनाकर जीत का लक्ष्य हासिल किया.
भारतीय पारी में केदार जाधव ने सर्वाधिक 81 रन बनाए. जाधव ने 87 गेंदों की अपनी पारी में नौ चौके और एक छक्का जड़ा. वहीं महेंद्र सिंह धोनी ने 72 गेंदों में छह चौके और एक छक्का जमाकर नाबाद 59 रनों की पारी खेली.
जाधव को उनके हरफनमौला प्रदर्शन के लिए 'मैन ऑफ़ द मैच' का पुरस्कार दिया गया. जाधव ने शानदार बल्लेबाज़ी के साथ-साथ गेंद से भी बेहतरीन प्रदर्शन किया. उन्होंने 7 ओवर में 31 रन देकर एक विकेट लिए.
कप्तान विराट कोहली ने 44 रन (45 गेंद, छह चौके एक छक्का) और रोहित शर्मा ने 37 रन (66 गेंद, पांच चौके) का योगदान दिया. इसके अलावा सलामी बल्लेबाज़ शिखर धवन बिना खाता खोले आउट हुए और अंबाति रायडु ने 13 रनों की पारी खेली.
मैच के बाद भारतीय कप्तान कोहली ने जाधव और धोनी के साथ-साथ गेंदबाज़ों की प्रशंसा करते हुए कहा, "यह एक मुश्किल मैच था. हमने वाकई अच्छी बल्लेबाज़ी की. गेंदबाज़ों ने हमारे लिए मैच बनाया और बल्लेबाज़ी के दौरान हमें एक बड़ी साझेदारी की ज़रूरत थी. आज धोनी और केदार ने इसकी ज़िम्मेदारी ली. दोनों ने बहुत बेहतरीन प्रदर्शन किया है."
वहीं ऑस्ट्रेलियाई कप्तान फिंच ने कहा, "मुझे लगता है हमें 20 या 30 रन और बनाने चाहिए थे. गेंदबाज़ों ने बढ़िया बॉल डाले. हालांकि हम लगातार विकेट लेने में कामयाब नहीं हुए जो किसी अच्छी टीम पर जीत के लिए बेहद ज़रूरी होता है."
दो टी20 मैचों की सिरीज़ को 0-2 से हारने के बाद भारत ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ पांच वनडे मैचों की सिरीज़ खेल रहा है.
पहले बल्लेबाज़ी करते हुए ऑस्ट्रेलिया की टीम ने निर्धारित 50 ओवरों में 7 विकेट गंवा कर 236 रन बनाए.
ऑस्ट्रेलियाई टीम की तरफ से सलामी बल्लेबाज़ उस्मान ख्वाजा ने सर्वाधिक 50 रन बनाए. उनके अलावा ग्लेन मैक्सवेल ने 40 रनों की पारी खेली.
वहीं भारतीय टीम के लिए जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी और कुलदीप यादव ने 2-2 विकेट लिए. वहीं केदार जाधव को एक विकेट मिला.
हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में खेले जा रहे इस मैच में ऑस्ट्रेलिया ने स्पिनर एश्टन टर्नर को अपना वनडे करियर शुरू करने का मौका दिया है वहीं कप्तान एरॉन फिंच के करियर का यह 100वां वनडे मैच है.
फिंच ने टॉस जीतने के बाद पहले बल्लेबाज़ी करने का फ़ैसला किया लेकिन वो खाता नहीं खोल सके.
उन्हें जसप्रीत बुमराह ने धोनी के हाथों कैच आउट किया. इस दौरान उन्होंने केवल तीन गेंदों को सामाना किया.
फिंच पिछले कुछ समय से ख़राब लय में चल रहे हैं. जून 2018 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ शतक जड़ने के बाद से आठ वनडे मैचों में उन्होंने केवल 83 रन बनाए हैं.
वनडे सिरीज़ से पहले भारत के साथ खेले गए दो टी20 मैचों को ऑस्ट्रेलिया ने ज़रूर जीता लेकिन वहां भी फिंच का बल्ला खामोश रहा. उन्होंने इन दो मैचों में शून्य और आठ का स्कोर किया.
2013 में वनडे क्रिकेट में अपने करियर का आगाज करने वाले फिंच अब तक 100 वनडे मैचों में 36.25 की औसत के साथ 11 शतकों और 18 अर्धशतकों समेत 3,444 रन बना चुके हैं.
इस दौरान वो 9 बार बिना खाता खोले ही पवेलियन लौटे हैं.
दूसरे ओवर में फिंच के आउट होने के बाद ऑस्ट्रेलिया का दूसरा विकेट 21वें ओवर में मार्कस स्टोइनिस (37) के रूप में गिरा. उन्हें केदार जाधव ने विराट कोहली के हाथों कैच आउट कराया.
इसके बाद कुलदीप यादव ने 24वें ओवर में उस्मान ख्वाजा को 30वें ओवर में पीटर हैंड्सकॉम्ब को आउट किया.
फिर मोहम्मद शमी ने 38वें ओवर में एश्टन टर्नर (21) को भी चलता कर दिया.
दूसरे टी20 में भारत से मैच छीनने वाले ग्लेन मैक्सवेल (40) को 40वें ओवर में बोल्ड कर मोहम्मद शमी ने ऑस्ट्रेलिया के किसी भी बड़े स्कोर की संभावना को धूमिल कर दिया.
पांच मैचों की यह एकदिवसीय सिरीज़ भारतीय टीम के लिए बहुत अहम है क्योंकि यह इंग्लैंड में होने वाली विश्व कप से पहले भारत का यह आखिरी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट है. हां, खिलाड़ियों के लिए आईपीएल में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर्स के साथ प्रैक्टिस करने का मौका ज़रूर मिलेगा.
कप्तान विराट कोहली ने मैच की पूर्वसंध्या पर इस बात के संकेत भी दिए कि यह सिरीज़ विश्व कप की टीम चुनने में अहम भूमिका निभाएगी.
उन्होंने कहा था कि, "मुझे नहीं लगता कि आईपीएल का विश्व कप चयन पर कोई प्रभाव पड़ेगा. आईपीएल में जाने से पहले ही हमें एक मजबूत टीम तैयार करना है. अगर कुछ खिलाड़ी आईपीएल में अच्छा नहीं करते हैं तो वो विश्व कप टीम से बाहर नहीं होंगे."
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